बुधवार, 4 अक्टूबर 2017

कोच्चि के लिए दूसरी फ्लाइट

 एयरपोर्ट की भागमभाग में लगेज भूलना ,घर से दो घण्टे की लम्बी ड्राइव के बाद रायपुर से मुम्बई की पहली फ्लाइट, फिर दो घण्टे मुंबई एयरपोर्ट में इंतजार और कोच्चि के लिए दूसरी फ्लाइट । अंत में कोच्चि एयरपोर्ट से मुन्नार तक 5 घण्टे की लम्बी सड़क यात्रा । सुबह 6 बजे से लगातार सफर से रात 9 बजे होटल पहुँचते थककर चूर हो चुके थे । होटल के रेस्टोरेंट में डिनर ले कमरे में आते ही गहरी नींद में डूब गयी । शाम को देखे चियापारा जलप्रपात के धूम्र छीटें पूरी रात स्वप्न को भीगोते रहे । सुबह 6 बजे खिड़की पर लगा पर्दा खिसकाया । ऊँचाई से नीचे होटल की पार्किंग में रखी ढेरों गाड़ियां दिख रही थी । अरे गाड़ी के पास रिज़वी अभी से क्या कर रहा है ?? बाद में मालूम हुआ कि होटल की पार्किंग में लगी सभी गाड़िया पर्यटकों को घुमाने वाले ड्राइवर के मालिकों की है । 10 दिनों तक केरल के अलग अलग प्राकृतिक स्थानों को घुमाने वाले इन ड्राइवर्स का पूरा जीवन अपने परिवार से दूर गुजर जाता है ।
जिन खतरनाक रास्तों पर साँसे थामे हम सुरक्षित निकल आने की दुआ मांग रहे थे उन खतरों से ये रोज खेलते है । हर बार एक अजनबी परिवार के साथ दिन रात साथ रहते ये बंजारे ड्राइवर्स 10 दिन के लिए उस परिवार के सदस्य हो जाते है। भिन्न भिन्न पड़ाव पर हमपेशा ड्राइवर्स आपस में अक्सर मिलते रहते है । इनकी कार की सीट ही रात का बिस्तर होती है । मैने गाड़ी की डिक्की में रिज़वी का भी एक छोटा सूटकेस देखा था । सभी ड्राइवर्स घुटनों तक मुड़ी सफ़ेद लूँगी पहने अपनी गाड़ियां धोते मलयाली में हँसी मज़ाक कर रहे है । फोन पर चाय ऑर्डर कर कमरे की दूसरी दिशा में एक दरवाज़ा की तरफ़ बढ़ी । रात में थकान से कमरे में आते ही बिस्तर पर धम्म वाली हालत थी । इस दरवाज़े पर लगे पर्दे की वज़ह से ध्यान भी नही गया था। पर्दा हटाकर दरवाज़ा खोला और सचमुच चीख पड़ी ....ओह नो ,ओह्ह नो ..माय गॉड .. खिड़की से सटे पहाड़ पर चाय बागान से आच्छादित मखमली गुदाज़ कालीन बिछी थी ।
रात के अंधेरे में हम इसी रास्ते से आये थे लेकिन अंधेरा होने की वजह से इस अद्भुत नजारे से वंचित रह गए थे । मैंने पहली बार चाय बागान देखे । सफेद उड़ते बादलों से थपकियाँ लेता चाय बागानों वाला पहाड़ । मेरी हाय हाय से पतिदेव की नींद खुल गयी -- ये तुम्हारा अच्छा है खुद की नींद खुल जाए तो दूसरों का सोना हराम कर दो । मैंने लगभग हाथ खींचते हुए कहा -- चाय बागान से आपके लिए चाय आर्डर किया है । बस कमरे में आती ही होगी ।
आपके लिए केरल यात्रा का ये लेख लिखते वक़्त भी लग रहा है कि मैं वापस अपने घर में हूँ और मुन्नार के ऊँचे पहाड़ों पर बादलों की दौड़ा भागी के बीच वो चाय बागान वैसे ही चमचमा रहे होंगे । समझ नही आ रहा है कि जिन्होंने चाय के बागान नही देखे उनकों उस सौंदर्य की सटीक वयाख्या करने वाली शब्दशक्ति कहाँ से लाऊ, फिर भी कोशिश कर रही हूँ । कल्पना करिए कि कच्ची सुबह की भीनी भीनी महक में जहाँ तक नज़र जा रही है वहाँ तक पहाड़ तराश कर उकेरे चाय बागान फैले है । व्यवस्थित, समान ऊँचाई की चाय की घनी झाड़ियों की कंच हरी पत्तियाँ कोहरे में लिपटी धूप की बाट जोह रही है । क्षितिज से गलबहियाँ करते चाय बागान अपने रूप लावण्य से बेखबर अलमस्त दूर तक पसरे हुए है । पहाड़ के ऊबड़खाबड़ , असमतल रूप से रुष्ट किसी ने समतल हरे गलीचे से इन बुलंदियों को ढाँक दिया जैसे । सम्पूर्ण पहाड़ी ढाल पर चाय की सघन झाड़ियों के बीच थोड़े थोड़े अंतराल पर पहाड़ को गोलाई में लपेटती पगडंडियाँ । होटल की बालकनी से देखने पर लगता था कि पहाड़ों पर दूर दूर तक गुदगुदी हरी कालीन बीछी है जिस पर काली पगडंडियों की लकीरें है । चपल , चंचल बादलों के बेपरवाह कारवाँ अथखलियाँ करते घने बागानों में घुसपैठ कर रहे थे । अब तक चाय के लिए कमरे की काल बेल बज चुकी थी । सर्विस बॉय को चाय बालकनी की टेबल पर लगाने के लिए कह पतिदेव को आवाज़ दी -- चीयर्स ..हाट टी सिटींग इनसाइड अ कोल्ड टी गार्डन ।
इस बीच कान्हा जी भी आँख मलते पहुँच गए -- मम्मा आज बाहुबली के गाँव जाएंगे न ?? रिज़वी अंकल ने प्रॉमिस किया है । हम सभी इडली , सांभर , उत्तपम्म , डोसा , नारियल चटनी के नाश्ते के बाद 9 बजे तक तैयार हो चुके थे। कार में बैठते ही रिज़वी ने आज के आनन्द की घोषणा की -- तुमको माल्लुम है, आज हम चलेंगे मुन्नार के राजामलाई इराइकुलम नेशनल पार्क , मट्टुपेट्टी डेम , देवीकुलम नयनामक्कड़ और अटटुकाल वाटरफॉल । हे भगवान ! थोड़ा तो लिहाज़ किया होता इतने कठिन नाम बोलने से पहले । अंकल इन सब जगह में बाहुबली का गाँव कौन सा है ?? रिज़वी ने कान्हा की व्यग्रता देख सांत्वना दी -- चलेंगा न कानन । यू फिकर नाट । हमारी कार चाय बागानों के बीच लहराती सड़कों पर आगे बढ़ रही थी ।अब हम केरल के समुद्री इलाके से बहुत दूर हिल स्टेशन मुन्नार में थे जहाँ नारियल के समुद्रतटीय पेडों का नामो निशान न था । इन पहाड़ों पर घने और बेतरतीब जंगल खत्म हो चुके थे । यहाँ इंसानों के करीने से तराशे चाय बगीचों का एकछत्र आधिपत्य था । सड़क के दोनों तरफ विशाल पेडों पर अफ्रीकन ट्यूलिप के सिंदूरी फूलों के गुच्छे झूम रहे थे । इनके गहरे व चटक नारंगी रंग प्लास्टिक के नकली फूलों का आभास दे रहे थे । यू ही उग आए खरपतवारो पर भी गहरे जामुनी , नीले फूलों की छटा देखने लायक थी । हमारें शहरी गार्डन से अधिक फूल तो सड़क के दोनों तरफ की बेल और पेड़ों पर थे शायद इसलिए ही केरल में भिन्न भिन्न रंग के फूलों की रंगोली बनती है और महिलाएँ भी फूलों का शृंगार करती है ।
. यत्र तत्र फूलों से अटी पड़ी सड़के देख प्रकृति के सौतेले व्यवहार से शिकायत हुई । पटादी के फूलों से पेड़ लदे थे । चाय बागान की गझिन हरियाली में भी गुंजाइश निकाल झाड़ियों के बीच जमीन पर रेंगती नाज़ुक लताओं के जाल में छोटे छोटे पीले और गुलाबी रंग के असंख्य फूल परियों के देश से आये लगते थे । पारिझर के हथेली के आकार के कागज़ के खोमचों जैसे लम्बे गुलाबी फूल । दोपहर तक हम मलयाली नाम वाले "मट्टुपेट्टी डेम" पहुँच चुके थे । डेम कुछ खास आकर्षक नही था ।पर्यटकों को ध्यान में रख बोटिंग आदि की व्यवस्था थी । कान्हा जी को बोटिंग में पैडल मारने में लगने वाला पिछला श्रम याद था -- मम्मा मुझे बोटिंग में नही जाना । रतनपुर में पैडल मार मार के इतना थक गया था कि मन हो रहा था कि झील में कूद कर तैरकर बाहर आ जाऊ ।हम माँ बेटे का ध्यान ठेलों पर बिक रहे ताजा पाइन एप्पल स्लाइस और नारियल पानी पर था -- आओ रिज़वी आप भी पाइन एप्पल खाओ । रिज़वी ने झेंपते हुए मना कर दिया -- नई मैम अभी इधरी रसम-चावल खा लिया है मई (मैं) । आज में (मैं) बहुत परेशान हो गया ।मेरा फोन खराब हो गया ।आपका फोन देते तो थोड़ा फैमिली से बात करने का था । मेरी(मुझे) को फोन बिगड़ने के टेंशन हो गया । मैने पतिदेव को आवाज़ लगाई -- रिज़वी का फोन बिगड़ गया है। जरा देख लीजिए । पतिदेव की लैपटाप और मोबाइल में सिद्धहस्तता पर मुझे विश्वास था । फोन खोलने के 10 मिनिट के भीतर ही उन्होंने फोन ठीक कर उसके हाथ में थमा दिया -- रिज़वी खुशी से उछल पड़ा -- या लिल्हा । ओहो आपने तो मेरा फोन ठीक कर दिया। तुमको माल्लुम है, मेरा पूरा नम्बर था इसमें । मेरे को कितना टेंशन हो गया थी । रिज़वी ने मोबाइल में अपनी खूबसूरत पत्नी और बच्चें की तस्वीरें दिखाई । कान्हा के जितनी ही उम्र का उसका बेटा था । मेरा मन फिर बुझ गया यह जानकर कि दुनिया भर के बेगानों को केरल घुमाने वाला रिज़वी चाहकर भी अपने बच्चों को केरल नही घूमा पाया है । बातों ही बातों में पता चला कि 18 साल में शादी करने के बाद रिज़वी सऊदी अरब चला गया था । केरल में हर चौथा आदमी खाड़ी देशों में छोटी मोटी नौकरी करता है ।
रिज़वी वहाँ 10 साल गाढ़ी मेहनत की कमाई कर 6 साल पहले केरल लौटकर फर्नीचर का व्यवसाय शुरू किया था । अपने सरल स्वभाव की वजह से उधार के ग्राहकों ने धंधा डूबा दिया। पिछले चार साल से अपने मालिक की यह गाड़ी चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा है । 9 लाख का बैंक लोन भी चुकाना है । सड़क पर नज़र जमाए स्टेरिंग घुमाते रिजवी ने फीकी हँसी के साथ कहा -- आदमी कुछ सोचता है मगर खुदा बन्दों के लिए कुछ और सोच के रखता है ।कहाँ में 6 नौकर रखा था कहाँ आज अपने मालिक का गाड़ी चला रहा हूँ । तुमकों माल्लुम ,में थोड़ा सा चालाक होता था तो आज आगे बढ़ गया होता अब तक । चलती कार में पल भर को उदासी पसर गयी ।मेरे पति ने शांत लहज़े में पूछा -- आगे बढ़ना किसको बोलते है रिज़वी ? बड़े बड़े बिजनेसमैन को गोली मार दी जाती है , कोई घाटे से आत्महत्या कर लेता है , किसी को पारिवारिक कलह है , कोई शरीर से लाचार हो गया है । जिंदगी की सबसे बड़ी सफलता खुश रहने की कला है ।तुम खुश हो या नही ? उलझे भावों में डूबे रिज़वी ने भंवर से उबर आने वाली सच्ची संतुष्टि के साथ कहा -- हाँ सर में खुश तो बहुत रहता हूँ । उदर सऊदी में था तो अपना देश बहोत याद आता था । वो लोग हम इंडियंस को सही ट्रीट नही करता ।इदर पैसा कम है मगर सर अपना जगह अपना होता है । ये घर पे मेरा बीवी और माँ का आपस में थोड़ा किटकिट रहता है बाकी खुदा ने मेरे मन में तसल्ली बहुत दिया है । देखो पइसा ऐसा चीज़ है कल मेरे पास था आज नही कल शायद फिर हो ।
माहौल फिर हल्का हो गया । "अब हम कहाँ जा रहे है ?" इस प्रश्न का उत्तर सिर्फ रिज़वी के पास होता था । रिज़वी के मालिक ने रिज़वी को हमारे हर दिन के शेड्यूल का कई पन्नों वाला एक मोटा पत्रा थमा दिया था । डेम से मायूस लौटते देख रिज़वी ने कहा अब हम लोग बहोत सुन्दर जगह जा रहा है । मैंने थकी आवाज़ में कहा --तुम कही न ले जाओ बस इन पहाड़ों पर ही गाड़ी चलाते रहो। कितने सुन्दर है ये । मौसम में वो आद्रता थी कि पेडों के मोटे तनों पर काई की मोटी मख़मली परत चढ़ गई थी । पहाड़ों में हर थोड़ी दूर पर हरा पानी लिए बड़ी बड़ी झील की तश्तरियाँ रखी थी । शांत झील को घेरे हुए पहाड़ की बुलन्दी को भी चुनौती देते आकाश चूमते यूकेलीप्ट्स के सीधे खड़े पेड़ । वीरान पहाड़ों पर लटकती इक्का दुक्का झोपड़ियां। जाने कौन लोग होंगे जो इन घरों में रहते होंगे ?? वो जो टोकरा दीवार से लटक रहा है क्या उसमें चाय की पत्तियाँ तोड़ी जाती है ??
"मम्मा देखो ये केरल के लोग कितने बुरे है । इतनी सुंदर जगह में भी पहाड़ पर मैंने स्कूल देखा था ।"कार के भीतर ठहाकों की वजह कान्हा की समझ से परे था । घने जंगलों के तिलस्म में डूबे पहाड़ , खुले चाय बागानों की चादरों वाले बीछे पहाड़, काली चट्टानों पर रिसते झरनों वाले वनस्पतिरहित पथरीले पहाड़ , गोल्फ के हरे मैदान जैसे हाथियों की चारागाह वाले पहाड़ , लबरेज़ झील को अंजुली में सहेजे पहाड़ । लगातार रूप बदलते पहाड़ किसी मायावी नायिका से लग रहे थे |( शेष यात्रा कल)

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बैजनाथ महादेव, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)


बैजनाथ महादेव, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)
कैसे जाएँ : बैजनाथ जाने के लिए पहले तो आपको पठानकोट जाना होगा। पठानकोट से बैजनाथ के लिए डायरेक्ट बसें है और आप चाहे तो पठानकोट से काँगड़ा और उसके बाद काँगड़ा से बैजनाथ जा सकते हैं। अगर आप पूरे रास्ते ट्रेन से ही जाना चाहते हैं तो पठानकोट से जोगिन्दर नगर छोटी लाइन (काँगड़ा वैली ट्रेन) से जा सकते है। यहाँ बैजनाथ मंदिर नाम से ही स्टेशन है जो मंदिर से 1 किलोमीटर दूर है, यदि आप यहाँ उतरते है तो आपको ये 1 किलोमीटर का सफर चढ़ाई करके पूरी करनी होगी, तो इससे अच्छा आप पपरोला उतर जाएँ जाएँ तो मंदिर से 3 किलोमीटर पहले है। यहाँ से आप बस से चले जाये तो बिलकुल मंदिर के पास में ही उतारेगी।
कहाँ ठहरें : यहाँ ठहरने के लिए प्राइवेट गेस्ट हाउस और होटल तो है ही और इसके अलावा यहाँ मंदिर न्यास प्राधिकरण द्वारा संचालित गेस्ट हाउस है जो बहुत ही किफायती और अच्छी है।

बुधवार, 27 सितंबर 2017

सौर सुजला योजना में अब एक से पांच हार्स का पंप लगा सकते हैं किसान




सौर सुजला योजना में अब एक से पांच हार्स का पंप लगा सकते हैं किसान

सौर सुजला योजना के तहत स्थापित सोलर पंप किसानों की किस्मत को बदलने में अहम भूमिका निभाने लगे है। सिंचाई के लिए मौसम एवं प्रकृति पर निर्भर रहने वाले किसानों के लिए बिना प्रदूषण, आवाज और विद्युत शुल्क का व्यय किए ये पंप सौर उर्जा के माध्यम से किसानों के सहायक बन गए है। पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में संख्या दृष्टि से दूसरे स्थान पर महासमुंद जिले के लगभग एक हजार किसानों ने प्रधानमंत्री सौर सुजला योजना के अनुदान का लाभ लेते हुए इसे अपने खेतों में लगाया है। इस वर्ष योजना में आंशिक परिर्वतन किया गया है, और अब किसान 1 एच.पी. से लेकर 5 एच.पी. के पंप अनुदान के माध्यम से लगा सकते है। यह अनुदान अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ समान्य वर्ग के किसानों को भी मिलता है।
क्रेडा के सहायक यंत्री श्री संदीप कुमार बंजारे ने बताया कि इस योजना के तहत आवेदन लेने की कार्रवाई की जा रही है। आवेदन पत्र कृषि या क्रेडा विभाग के कार्यालय में दिया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, जमीन में लगने वाले भूमि फोटो एवं खसरा और रकबा का सत्यापित नक्शा, बैंक पासबुक, स्थापना स्थल के फोटोग्राफ, हितग्राही की दो फोटो और फार्म में लगने वाले प्रोसेसिंग शुल्क की राशि जमा करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पात्रता ऐसे किसानों को होगी, जिनके पंप में स्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं हैं, एक सकल नलकूप से दूसरे नलकूप की दूरी 300 मीटर है, समीप के नदी और नालों में कम से कम 3 फीट पानी होना चाहिए। सोलर पंप कुएं में भी स्थापित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि एक एचपी का सौर सुजला पंप लगाने के लिए 1200 रूपए का प्रोसेसिंग शुल्क लिया जाता है। पंप के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों द्वारा 3500 रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग के किसानों को 6 हजार रूपए और सामान्य वर्ग के किसानों को 14 हजार अंशदान दिया जाता है। शेष राशि अनुदान के रूप में शासन द्वारा दी जाती है। इसी प्रकार 2 एच.पी. पंप का प्रोसेसिंग शुल्क 1800 रूपए है, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति द्वारा 5 हजार रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग द्वारा 9 हजार और सामान्य वर्ग के किसानों द्वारा 16 हजार अंशदान दिया जाता है। शेष राशि शासन द्वारा अनुदान के रूप में दी जाती है। 3 एचपी पंप का  प्रोसेसिंग शुल्क 3हजार रूपए हैं, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति द्वारा 7 हजार रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग द्वारा 12 हजार और सामान्य वर्ग के हितग्राही द्वारा 18 हजार रूपए का अंशदान दिया जाता है। पांच एचपी पंप का प्रोसेसिंग शुल्क 4800 रूपए हैं। इसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति द्वारा 10 हजार रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग द्वारा 15 हजार और सामान्य वर्ग के किसानों द्वारा 20 हजार अंशदान दिया जाता है।

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

ओरछा-राजा राम का मंदिर - राम राम राजा राम राम...

ओरछा-राजा राम का मंदिर - राम राम राजा राम राम...
देश में राजा राम चंद्र का एक ऐसा मंदिर है जहां राम की पूजा भगवान के तौर पर नहीं बल्कि राजा के रूप में की जाती है। अब राजा राम हैं तो उन्हें सिपाही सलामी भी देते हैं। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित ओरछा के राजा राम मंदिर की। यहां राजा राम को सूर्योदय के पूर्व और सूर्यास्त के पश्चात सलामी दी जाती है। इस सलामी के लिए मध्य प्रदेश पुलिस के जवान तैनात होते हैं।
राजा राम का मंदिर देखने में किसी राज महल सा प्रतीत होता है। मंदिर की वास्तुकला बुंदेला स्थापत्य का सुंदर नमूना नजर आता है। कहा जाता है कि राजा राम की मूर्ति स्थापना के लिए चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था। पर मंदिर बनने से पहले इसे कुछ समय के लिए महल में स्थापित किया गया। लेकिन मंदिर बनने के बाद कोई भी मूर्ति को उसके स्थान से हिला नहीं पाया। इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हुए महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया और इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर।
आज इस महल के चारों ओर शहर बसा है।
हर रोज आते हैं राजा राम यहां पर
कहा जाता है कि यहां राजा राम हर रोज अयोध्या से अदृश्य रूप में आते हैं। ओरछा शहर के मुख्य चौराहा के एक तरफ राजा राम का मंदिर है तो दूसरी तरफ ओरछा का प्रसिद्ध किला।
मंदिर में राजा राम, लक्ष्मण और माता जानकी की मूर्तियां स्थापित हैं। इनका श्रंगार अद्भुत होता है। मंदिर का प्रांगण काफी विशाल है। चूंकि ये राजा का मंदिर है इसलिए इसके खुलने और बंद होने का समय भी तय है। सुबह में मंदिर आठ बजे से साढ़े दस बजे तक आम लोगों के दर्शन के लिए खुलता है। इसके बाद शाम को मंदिर आठ बजे दुबारा खुलता है।
रात को साढ़े दस बजे राजा शयन के लिए चले जाते हैं। मंदिर में प्रातःकालीन और सांयकालीन आरती होती है जिसे आप देख सकते हैं। देश में अयोध्या के कनक मंदिर के बाद ये राम का दूसरा भव्य मंदिर है।
मंदिर परिसर में फोटोग्राफी निषेध है। मंदिर का प्रबंधन मध्य प्रदेश शासन के हवाले है। पर लोकतांत्रिक सरकार भी ओरछा में राजाराम की हूकुमत को सलाम करती है। ओरछा शहर को कई तरह के करों से छूट मिली हुई है। यहां पर लोग राजा राम के डर से रिश्वत नहीं लेते और भ्रष्टाचार करने से डरते हैं।
महारानी लाई थीं राजा राम को – कहा जाता है कि संवत 1600 में तत्कालीन बुंदेला शासक महाराजा मधुकर शाह की पत्नी महारानी कुअंरि गणेश राजा राम को अयोध्या से ओरछा लाई थीं। एक दिन ओरछा नरेश मधुकरशाह ने अपनी पत्नी गणेशकुंवरि से कृष्ण उपासना के इरादे से वृंदावन चलने को कहा।
लेकिन रानी तो राम की भक्त थीं। उन्होंने वृंदावन जाने से मना कर दिया। गुस्से में आकर राजा ने उनसे यह कहा कि तुम इतनी राम भक्त हो तो जाकर अपने राम को ओरछा ले आओ। रानी ने अयोध्या पहुंचकर सरयू नदी के किनारे लक्ष्मण किले के पास अपनी कुटी बनाकर साधना आरंभ की।
इन्हीं दिनों संत शिरोमणि तुलसीदास भी अयोध्या में साधना रत थे। संत से आशीर्वाद पाकर रानी की आराधना और दृढ़ होती गई। लेकिन रानी को कई महीनों तक राजा राम के दर्शन नहीं हुए। वह निराश होकर अपने प्राण त्यागने सरयू की मझधार में कूद पड़ी। यहीं जल की अतल गहराइयों में उन्हें राजा राम के दर्शन हुए।
रानी ने उनसे ओरछा चलने का आग्रह किया। उस समय मर्यादा पुरुशोत्तम श्रीराम ने शर्त रखी थी कि वे ओरछा तभी जाएंगे, जब इलाके में उन्हीं की सत्ता रहे और राजशाही पूरी तरह से खत्म हो जाए। तब महाराजा शाह ने ओरछा में ‘रामराज' की स्थापना की थी, जो आज भी कायम है।
मंदिर के प्रसाद में पान का बीड़ा – राजा राम मंदिर में प्रशासन की ओर से प्रसाद का काउंटर है। यहां 20 रुपये का प्रसाद मिलता है। प्रसाद में लड्डू और पान का बीड़ा दिया जाता है। हालांकि मंदिर के बाहर भी प्रसाद की तमाम दुकाने हैं जहां से आप फूल प्रसाद आदि लेकर मंदिर में जा सकते हैं। मंदिर के बाहर जूते रखने के लिए निःशुल्क काउंटर बना है। राजा राम मंदिर में रामनवमी बड़ा त्योहार होता है।
बेल्ट लगाकर नहीं जा सकते- आप राजा राम के मंदिर के अंदर बेल्ट लगाकर नहीं जा सकते हैं। इसके पीछे बड़ा रोचक तर्क ये दिया जाता है कि राजा के दरबार में कमर कस कर नहीं जाया जा सकता है। यहां सिर्फ राजा राम की सेवा में तैनात सिपाही ही कमरबंद लगा सकते हैं। आप जूता घर में अपना बेल्ट जमा करके फिर मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं।
राजा राम के मंदिर की मूर्तियों के बारे में कहा जाता है कि ये अयोध्या से लाई गई हैं। महारानी की कहानी के मुताबिक उनकी तपस्या के कारण राजा राम अयोध्या से ओरछा चले आए थे। पर स्थानीय बुद्धिजीवी मानते हैं कि बाबर के आदेश पर अयोध्या में राम मंदिर तोड़े जाने के बाद अयोध्या के बाकी मंदिरों की सुरक्षा का सवाल उठने लगा। ऐसी स्थित में कई मंदिरों की बेशकीमती मूर्तियों को ओरछा में लाकर सुरक्षित किया गया।
ऐसा कहा जाता है कि ओरछा के ज्यादातर मंदिरों में जो मूर्तियां हैं वे अयोध्या से लाई गई हैं

शनिवार, 23 सितंबर 2017

राजगीर

राजगीर
तापमान: गर्मियों अधिकतम 40 °C, न्यूनतम 20 °C तथा जाड़ों में अधिकतम 28 °C, न्यूनतम 6 °C
वर्षा: 1,860 मिमी (मध्य-जून से मध्य-सितंबर)
सबसे उपयुक्त: अक्टूबर से अप्रैल
दर्शनीय स्थल
गृद्धकूट पर्वत : इस पर्वत पर बुद्ध ने कई महत्वपूर्ण उपदेश दिये थे। जापान के बुद्ध संघ ने इसकी चोटी पर एक विशाल “शान्ति स्तूप” का निर्माण करवाया है जो आजकल पर्यटकों के आकर्षण का मूख्य केन्द्र है। स्तूप के चारों कोणों पर बुद्ध की चार प्रतिमाएं स्थापित हैं। स्तूप तक पहुंचने के लिए पहले पैदल चढ़ाई करनी पड़ती थी पर बाद में एक “रज्जू मार्ग” भी बनाया गया है जो यात्रा को और भी रोमांचक बना देता है।
वेणुवन : बाँसों के इस रमणीक वन में बसे “वेणुवन विहार” को बिम्बिसार ने भगवान बुद्ध के रहने के लिए बनवाया था।
गर्म जल के झरने : वैभव पर्वत की सीढ़ियों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने (सप्तधाराएं) हैं जहां सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है। इन झरनों के पानी में कई चिकित्सकीय गुण होने के प्रमाण मिले हैं। पुरुषों और महिलाओं के नहाने के लिए 22 कुन्ड बनाए गये हैं। इनमें “ब्रह्मकुन्ड” का पानी सबसे गर्म (४५ डिग्री से.) होता है।
स्वर्ण भंडार : यह स्थान प्राचीन काल में जरासंध का सोने का खजाना था। कहा जाता है कि अब भी इस पर्वत की गुफ़ा के अन्दर अतुल मात्रा में सोना छुपा है और पत्थर के दरवाजे पर उसे खोलने का रहस्य भी किसी गुप्त भाषा में खुदा हुआ है। वह किसी और भाषा में नहीं बल्कि शंख लिपि है और वह लिपि बिंदुसार के शासन काल में चला करती थी।
जैन मंदिर : पहाड़ों की कंदराओं के बीच बने 26 जैन मंदिरों को आप दूर से देख सकते हैं पर वहां पहुंचने का मार्ग अत्यंत दुर्गम है। लेकिन अगर कोई प्रशिक्षित गाइड साथ में हो तो यह एक यादगार और बहुत रोमांचक यात्रा साबित हो सकती है। जैन मतावलंबियो में विपुलाचल, सोनागिरि, रत्नागिरि, उदयगिरि, वैभारगिरि यह पांच पहाड़ियाँ प्रसिद्ध हैं। जैन मान्यताओं के अनुसार इन पर 23 तीर्थंकरों का समवशरण आया था तथा कई मुनि मोक्ष भी गए हैं।
राजगीर का मलमास मेला : राजगीर की पहचान मेलों के नगर के रूप में भी है। इनमें सबसे प्रसिद्ध मकर और मलमास मेले के हैं। शास्त्रों में मलमास तेरहवें मास के रूप में वर्णित है। सनातन मत की ज्योतिषीय गणना के अनुसार तीन वर्ष में एक वर्ष 366 दिन का होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अतिरिक्त एक महीने को मलमास या अतिरिक्त मास कहा जाता है।
ऐतरेय बह्मण के अनुसार यह मास अपवित्र माना गया है और अग्नि पुराण के अनुसार इस अवधि में मूर्ति पूजा–प्रतिष्ठा, यज्ञदान, व्रत, वेदपाठ, उपनयन, नामकरण आदि वर्जित है। लेकिन इस अवधि में राजगीर सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। अग्नि पुराण एवं वायु पुराण आदि के अनुसार इस मलमास अवधि में सभी देवी देवता यहां आकर वास करते हैं। राजगीर के मुख्य ब्रह्मकुंड के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इसे ब्रह्माजी ने प्रकट किया था और मलमास में इस कुंड में स्नान का विशेष फल है।
मलमास मेले का ग्रामीण स्वरूप : राजगीर के मलमास मेले को नालंदा ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में आयोजित मेलों मे सबसे बड़ा कहा जा सकता है। इस मेले का लोग पूरे तीन साल इंतजार करते हैं। कुछ साल पहले तक यह मेला ठेठ देहाती हुआ करता था पर अब मेले में तीर्थयात्रियों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के झूले, सर्कस, आदि भी लगे होते हैं। युवाओं की सबसे ज्यादा भीड़ थियेटर में होती है जहां नर्तकियाँ अपनी मनमोहक अदाओं से दर्शकों का मनोरंजन करती हैं।
जीवकर्म : बुद्ध के समय प्रसिद्ध वैध जीवक राजगीर से थे। उन्होंने बुद्ध के नाम एक आश्रम समर्पित किया जिसे कहा जाता है।
तपोधर्म : तपोधर्म आश्रम गर्म चश्मों के स्थान पर स्थित है। आज वहाँ एक हिन्दू मन्दिर का निर्माण किया किया गया है जिसे लक्ष्मी नारायण मन्दिर का नाम दिया गया है। पूर्वकाल में तपोधर्म के स्थल पर एक बौद्ध आश्रम और गर्म चश्मे थे। राजा बिम्बिसार यहाँ पर कभी-कभार स्नान किया करते थे।
सप्तपर्णी गुफा : सप्तपर्णी गुफा के स्थल पर पहला बौद्ध परिषद का गठन हुआ था जिसका नेतृत्व महाकस्सप ने किया था। बुद्ध भी कभी-कभार वहाँ रहे थे, और यह अतिथि संन्यासियों के ठहरने के काम में आता था।
जरासंध का अखाडा़ : हिन्दू मान्यता के अनुसार महान परन्तु दुष्ट योद्धा जिसके बार-बार मथुरा पर हमले से श्री कृष्ण तंग आकर मथुरा-वासियों को द्वारका भेजना पड़ा, इसी स्थान पर हर दिन सैन्य कलाओं का अभ्यास करता था।
लक्ष्मी नारायण मंदिर : गुलाबी रंग वाली हिन्दू लक्ष्मी नारायण मन्दिर अपने दामन में प्रचीन गर्म चश्मे समाए हुए है। यह मन्दिर अपने नाम के अनुसार विष्णु भगवान और उनकी पत्नी लक्ष्मी को समर्पित है।
वास्तविक रूप में जल में एक डुपकी ही गर्म चश्मे को अनुभव करने का स्रोत था, परन्तु अब एक उच्च स्तरीय चश्मे को काम में लाया गया है जो कई आधूनिक पाइपों से होकर आता है जो एक हॉल की दीवारों से जुड़े हैं, जहाँ लोग बैठकर अपने ऊपर से जल के जाने का आनंद ले सकते हैं।
अन्य स्थान : अतिरिक्त पुरातत्व स्थलों में शामिल हैं:
1. कर्णदा टैंक जहा बुद्ध स्नान करते थे।
2. मनियार मठ जिसका इतिहास पहली शताब्दी का है।
3. मराका कुक्षी जहाँ अजन्मित अजातशत्रु को पिता की मृत्यु का कारण बनने का श्राप मिला
4. रणभूमि जहाँ भीम और जरासंध महाभारत की एक युद्ध लड़े थे
5. स्वर्णभण्डार गुफा
6. विश्वशांति स्तूप
7. एक पुराने दुर्ग के खण्डहर
8. 2500 साल पुरानी दीवारें
बिम्बिसार कारागार : घाटी के बीच एक गोलाईदार ढाँचे के खण्डहर हैं जिसके हर कोने में एक बुर्ज है। बिम्बिसार को उसके बेटे अजतशत्रु ने बन्दी बनाया था। इसके बावजूद वह गृधाकुट और बुद्ध को खिड़की से देख सकते थे।
कैसे जाएँ :
वायुमार्ग: निकटतम हवाई-अड्डा पटना (107 किमी).
रेलमार्ग: पटना, गया , वाराणसी, हावड़ा एवं दिल्ली से सीधी रेल सेवा।
सड़क द्वारा: पटना, गया, दिल्ली एवं कोलकाता से सीधा संपर्क।
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम पटना स्थित अपने कार्यालय से नालंदा एवं राजगीर के लिए वातानुकूलित टूरीस्ट बस एवं टैक्सी सेवा भी उपलब्ध करवाता है।

सोमवार, 4 सितंबर 2017

Auli in 1st week of december,

Hello Friends,

I am planning to go Auli in 1st week of december,can you please tell me is there any chance to see the snowfall at that time of period.

Please see my mentioned below itinerary and suggest me if i miss any thing.

Day 1 - Delhi to Haridwar
visit some temples of haridwar and overnight stay at Haridwar.

Day 2 - Leave haridwar early morning (5:00 am) and reach joshimath in the evening.
Overnight stay at Joshimath
Question: I will go by cab from haridwar to joshimath, how much time it will take?
Question: what are the places to see in joshimath?

Day 3 - Joshimath to Mana village
Overnight stay at Joshimath
Question: what are the places to see in mana village?

Day 4 - Joshimat to Auli
Overnight stay at Auli

Day 5 - Auli - Haridwar - Delhi

Thanks